भारतीय भाषाओं का संक्षिप्त इतिहास

क्या आपने कभी सोचा कि सभी भारतीय भाषाओं में कुछ शब्द एक जैसे क्यों होते हैं? क्या हमारी सभी भाषाओं की बुनियाद एक जैसी है? आइए, हम कुछ जवाब ढूंढने के लिए सभी भाषाओं और विशेष तौर पर भारतीय भाषाओं को एक विहंगम दृष्टि से देखें!

Written by: Chandrasekhar G

Translated by: Suchreet K

धरती पर रहने वाला हर एक सजीव प्राणी भोजन, नींद, प्रजनन और आत्मरक्षा के बारे में सोचता है। मानव ही एक ऐसी प्रजाति है जिसके पास इन सबसे ऊपर उठकर सोचने-समझने के लिए दिमागी शक्ति है। एक इंसान की तुलना में हाथी का आकार बहुत बड़ा होता है, हालांकि, उसका दिमाग एक सीमा से ऊपर नहीं सोच सकता। परन्तु मानव ने लगभग 70,000 वर्ष पूर्व विकास के दौरान ये सभी सीमाएं तोड़ दी हैं। इसे कभी-कभी संज्ञानात्मक परिवर्तन भी कहा जाता है। नई दिमागी शक्ति का विकास होने से मानव स्थायी भौगोलिक स्थानों में रहना शुरू कर देता है और अपने वातावरण के बारे में सीखना शुरू कर देता है। इस प्रकार प्राप्त जानकारी अपने साथियों के साथ साझा करना ज़रूरी हो जाता है। ज्ञान के इस स्थानांतरण ने पहले संकेतों का रूप लिया और इसके बाद ये ‘सांकेतिक भाषा’ कहलाए। बाद में, इस सांकेतिक भाषा ने शब्दों का रूप ले लिया और ‘भाषा’ बन गए। इसकी कोई लिपि नहीं थी, ऐसा केवल तभी था जब भाषा का विकास केवल एक ही स्तर पर हुआ था और जिसे भाषाविदों ने बनाया था। ऐसा होने का कारण था कि ‘संज्ञानात्मक परिवर्तन’ के बाद शुरुआती दौर में कई भाषाओं का विकास हुआ था, पर उनमें से बहुत-सी भाषाएं कुछ सीमित समय तक ही अस्तित्व में रहीं। इसलिए, यह निर्णय ले पाना बहुत मुश्किल है कि कौन-सी भाषा का विकास सबसे पहले हुआ था। फिर भी हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि मौजूदा भाषाओं में से किन भाषाओं का इतिहास सबसे लंबा और विस्तृत है।

भारत की भाषाएँ

संसार में लोगों की मौजूदा जनसंख्या करीब 770 करोड़ है और वे सभी 5,000 से ज़्यादा भाषाएं बोलते हैं। सन 2010 से 2013 के बीच किए गए People’s Linguistic Survey of India (PLSI) के अनुसार हमारे देश की जनसंख्या 130 करोड़ है और यहां 780 से ज़्यादा भाषाएं बोली जाती हैं। सन 1961 से 1650 की संख्या के साथ हर साल 10 भाषाएं हमसे दूर होती जा रही हैं। अगर ऐसा होता रहा तो आने वाले 100 साल में 500 भाषाएं काम होने पर भी कोई हैरानी नहीं होगी। भारतीय संविधान ने अपनी आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को ‘आधिकारिक भाषाओं’ का दर्जा दिया है: 1) असमिया 2) बंगाली 3) बोडो 4) डोगरी 5) गुजराती 6) हिंदी 7) कन्नड़ 8) कश्मीरी 9) कोंकणी 10) मिथिली 11) मलयालम 12) मणिपुरी 13) मराठी 14) नेपाली 15) उडिया 16) पंजाबी 17) 18) संथाली 1 9) सिंधी 20) तमिल 21) तेलुगू और 22) उर्दू।
उनकी जड़ों के आधार पर, भारतीय भाषाओं को 4 श्रेणियों में बांटा जा सकता है: 1. भारत-आर्य भाषा परिवार 2. द्रविड़ भाषा परिवार 3. खगोल-एशियाई भाषा परिवार 4. तिब्बती-बर्मन भाषा परिवार। हम इन 4 परिवारों को समझकर ज़्यादातर भारतीय भाषाओं के बारे में जानकारी पा सकते हैं।

भारत-आर्य भाषा परिवार

आइए, सबसे पहले भारत-आर्य भाषा परिवार के बारे में जानें। यह परिवार भारत-यूरोपीय भाषा परिवार का हिस्सा है, जो दुनिया में सबसे बड़ा है। इस परिवार में, सबसे पहली भाषा संस्कृत है। इस भाषा में ऋग वेद साहित्य का पहला हिस्सा है। कुछ लोग इसे पूरी दुनिया में साहित्य का पहला हिस्सा मानते हैं पर कुछ विद्वानों ने इसका विरोध किया है। वैदिक युग में संस्कृत का इस्तेमाल मुख्य रूप से धार्मिक अनुष्ठानों और संबंधित पूजा-पाठ करने के लिए किया गया था। इसके बीच का समय सन 1500 से 1000 ईसा पूर्व के बीच का था। बाद में, वैदिक संस्कृत का विकास अपने खुद के एक संस्करण में हुआ, जिसे शास्त्रीय संस्कृत कहा जाता था। यह कविता की भाषा थी। यह 1000 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तक रही। संस्कृत भाषा के इस संस्करण से, पाली, प्राकृत और अपभ्रंश भाषा का विकास 600 ईसा पूर्व से 1000 ईस्वी के दौरान हुआ।

पाली: 563 और 483 ईसा पूर्व के बीच। भगवान गौतम बुद्ध ने अपने अनुयायियों को इस भाषा में शिक्षा प्रदान की।

प्राकृत: 600 ईसा पूर्व और 1000 ईस्वी के बीच। इसका निर्माण शास्त्रीय संस्कृत से कुछ वर्णमाला खोने या इसके रूप को बदलकर जिया गया था। इसे कई बौद्ध और जैन ग्रंथों जैसे कि संपादकों, शिलालेखों और नाटकों में देखा जा सकता है।

अपभ्रंश: इन भाषाओं का निर्माण प्राकृत से हुआ था। क्योंकि वे साहित्य में इस्तेमाल की गई प्राकृत भाषा से अलग थीं, इसलिए, उन्हें अप-भ्राम नाम दिया गया।
आधुनिक भाषाएं: ये अप-भ्राम भाषाओं से पैदा हुईं थीं। इनमें से प्रमुख भाषाएं हैं – 1. हिंदी 2. उर्दू 3. बंगाली 4. पंजाबी 5. असमिया 6. गुजराती 7. उडिया 8. मराठी 9. कश्मीरी 10. कोंकणी 11. नेपाली 12. सिंधी और अन्य।

1. हिंदी: लगभग 1000 ईस्वी में, लगभग 65 करोड़ लोग हिंदी भाषा बोलते थे, जो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों में बड़े पैमाने पर रहते हैं। हिंदी की बोलियों को दो प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है।पश्चिमी क्षेत्र में राजस्थानी, वृजा, बुंदरी, मालवी, भोजपुरी और मेवाड़ी जैसी बोलियां थीं। एक बड़ी आबादी के बड़े हिस्से द्वारा बोले जाने के कारण एक गलत धारणा है कि हिंदी भारत की एकमात्र राष्ट्रीय भाषा है। वास्तव में, भारतीय संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त सभी 22 भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। लोगों की काम संख्या द्वारा बोले जाने के कारण दूसरी भाषाओं को बेकार समझना संकीर्ण मानसिकता का प्रतीक है।
2. उर्दू: पूरे देश में फैले 11 करोड़ लोग उर्दू बोलते थे, जिसका विकास दक्षिण भारत पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बाद सैनिक शिविरों, दुकानों और बाजारों से हुआ। हैदराबाद में डेक्कन क्षेत्र में, इसे दखिनी भी कहा जाता है।
3. बंगाली: पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में लगभग 30 करोड़ लोग इस भाषा बोलते हैं। इसका विकास लगभग 1000 ईस्वी पूर्व हुआ।
4. पंजाबी: लगभग 10 करोड़ लोग इस भाषा बोलते हैं। इसका विकास लगभग 1000 ईस्वी पूर्व हुआ।
5. गुजराती: लगभग 6.5 करोड़ लोग इस भाषा को बोलते हैं। इसका विकास लगभग 1100 ईस्वी पूर्व हुआ।
6. असमी: लगभग 2.5 करोड़ लोग इस भाषा कोबोलते हैं। इसका विकास लगभग 1200 ईस्वी पूर्व हुआ।
7. उड़िया: लगभग 4 करोड़ लोग इस भाषा को बोलते हैं। इसका विकास लगभग 1200 ईस्वी पूर्व हुआ।
8. मराठी: लगभग 8 करोड़ लोग इस भाषा को बोलते हैं। यह लगभग 1100 ईस्वी पूर्व हुआ था।
9. कश्मीरी: लगभग 0.5 करोड़ लोग इस भाषा बोलते हैं। यह करीब 900 ईस्वी पूर्व हुआ था।
10. कोंकणी: लगभग 0.5 करोड़ लोग जो गोवा में काफी हद तक रहते हैं और मैंगलोर, मुंबई और केरल में थोड़ी सी सीमा तक रहते हैं, यह
भाषा को बोलते हैं। यह भाषा बड़े पैमाने पर ईसाई समुदाय द्वारा बोली जाती है।
11. नेपाली: लगभग 1.7 करोड़ लोग इस भाषा को बोलते हैं।
12. सिंधी: देश भर में लगभग 2 करोड़ लोग इस भाषा को बोलते हैं।

द्रविड़ भाषा परिवार

इंडो-आर्य भाषा परिवार के बाद, द्रविड़ परिवार आकार के मामले में अगला है। इस परिवार में, 23 भाषाओं की पहचान की गई है। उनमें से प्रमुख हैं 1. तमिल, 2. तेलुगु, 3. कन्नड़ और मलयालम।
1. तमिल: यह दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है। भारत, श्रीलंका, सिंगापुर और मलेशिया में रहने वाले करीब 8 करोड़ लोग यह
भाषा बोलते हैं।
2. तेलुगू: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में रहने वाले करीब 8.5 करोड़ लोग यह भाषा बोलते हैं। यह लगभग 2,000 साल पुराणी है।
3. कन्नड़: लगभग 4.5 करोड़ लोग इस भाषा बोलते हैं। इसका इतिहास 2000 साल पुराना है।
4. मलयालम: केरल में रहने वाले लगभग 4 करोड़ लोग इस भाषा बोलते हैं। यह लगभग 1000 साल पहले तमिल से उत्पन्न हुई थी।
तमिल और मलयालम के साथ-साथ तेलुगु और कन्नड़ की लिपियों में कुछ समानताएं हैं।

खगोल-एशियाई भाषा परिवार

खगोल-एशियाई भाषा परिवार से संताली, मुंदारी, हू, सावरा, कॉर्क, जवांग, कासी, निकोबारिस भाषाएं आती हैं।

तिब्बती-बर्मन भाषा परिवार

तिब्बती-बर्मन परिवार से, बोडो, मणिपुरी, लुशा, गरो, भूटिमा, नेवारी, लेपचा, असमाका और मिकिर भाषाएं प्रमुख हैं।

पोस्ट स्क्रिप्ट
भारत-आर्य परिवार में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से अधिकांश भाषाओं की जड़ें संस्कृत भाषा में हैं। क्योंकि यह समय के साथ दुनिया में इसका प्रचलन खो गया है, इसलिए अनुमान है कि आज सिर्फ़ 15,000 लोग ही इसे बोलते हैं। यही कारण है कि
आज यह भाषा विल्पुत होती जा रही है और ज़्यादातर इसका इस्तमाल धार्मिक अनुष्ठानों में ही किया जाता है।

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