हमें नई भाषा क्यों सीखनी चाहिए?

केंद्रीय स्तर और राज्य स्तर पर शिक्षा बोर्डों में निर्धारित स्कूली पाठ्यक्रम के एक भाग के रूप में, अधिकांश भारतीय कम से कम दो भाषाएं पढ़ सकते हैं, लिख सकते हैं, और बोल सकते हैं, जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, इन भाषाओं के बारे में हमारी जानकारी भी बढ़ती है और यह जानकारी हमारी हर रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है. जिसकी वजह से, हमने कभी भी रुककर यह नहीं सोचा कि हमारी द्विभाषी या बहुभाषी प्रकृति हमें कैसे प्रभावित करती है।
Written by: Raghunath J

Translated by: Suchreet K

8वीं शताब्दी के रोमन राजा चार्ल्स द ग्रेट (जिन्हें ‘शारलेमेन’ के नाम से भी जाना जाता है) ने कहा कि दूसरी भाषा के पास दूसरी आत्मा है। किसी दूसरी भाषा की महान उपयोगिता के बारे में यह समझ और बढ़ गई, जब 21वीं सदी के अंग्रेजी लेखक ज्योफ्री विलान्स ने कहा कि आप एक भाषा को तब तक नहीं समझ सकते, जब तक आप दो भाषाओं को नहीं समझ सकते। किसी दूसरी भाषा को जानने से मानव मस्तिष्क पर मूर्त और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इससे रोज़गार के स्थान के साथ-साथ जीवन में भी कई और कई फ़ायदे होते हैं।

न्यूरोलॉजिकल प्रभाव

शोधकर्ता डॉ. वियोरिका मैरिएन और एंथोनी शुक ने पाया कि नई भाषा सीखने से कार्यों के बीच ध्यान और स्विच करने की दिमागी क्षमता में सुधार होता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हम में से ज़्यादातार, किसी दूसरी भाषा का इस्तेमाल करते समय भी अपनी मातृ भाषा में सोचते हैं, इस तरह से, हम एक भाषा का इस्तेमाल करते हुए भी दूसरी भाषा ग्रहण करते हैं. यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और इससे कार्यों के बीच स्विच करने की हमारी क्षमता बढ़ती रहती है. यहां तक कि सिर्फ़ सात महीने की उम्र वाले शिशुओं में भी कार्यों को स्विच करने की यह क्षमता देखी जा सकती है. अगर वे द्विभाषी वातावरण में बड़े होते हैं, उदाहरण के लिए, अगर परिवार के सदस्य और देखभाल करने वाले दूसरे लोग शिशु के आसपास एक से ज़्यादा भाषाएं बोलते हैं, तो वह आसानी से उन भाषाओं को समझने लगता है और सीख जाता है. अगर आपको लगता है कि एक नई भाषा सिर्फ़ बचपन में ही सीखी जा सकती है, तो एक बार फिर से सोचें. किसी भी नई भाषा को सीखने के लिए उम्र कभी रुकावट नहीं बंटी. इसलिए भी क्योंकि वरिष्ठ नागरिक एक नई भाषा सीखने के फ़ायदे देख सकते हैं. इससे संबंधित अध्ययन से पता चलता है कि एकभाषी लोगों की तुलना में द्विभाषी लोगों में, यादाश्त खोने की संभावना कम होती है

सामाजिक जीवन

जब हम नई भाषाएं सीखते हैं, तो भाषाओं के बीच अनुवाद करने की हमारी क्षमता में सुधार होता है. इससे हमारी बातचीत करने की कला में सुधार होता है और साथ ही तार्किक और पारस्परिक सोच का विकास करने में भी मदद मिलती है। जिससे हम अपने आप को और दूसरों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं, अपने विचार और भावनाएं बेहतर तरीके से समझा सकते हैं. इसके अलावा, आपने देखा होगा कि एक भाषा में कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनके समानार्थी शब्द दूसरी भाषा में नहीं मिलते, ऐसा इसलिए है क्योंकि उस शब्द की उत्पत्ति उस क्षेत्र की संस्कृति में, उसके लोगों की हर रोज़ की ज़िंदगी और जीवन के बारे में उनके दृष्टिकोण में निहित होती है. इसलिए, जब हम एक नई भाषा सीखते हैं और जो विचार हमारी भाषा में पूरी से नहीं खोजा गया है, उसका पता लगाने में दूसरे की क्षेत्र की संस्कृति और कला हमारी मदद करती है.

नौकरी के अवसर

दो या दो से अधिक भाषाओं को सीखने से आपका रिज्यूमे और बेहतर हो जाता है. इसका मतलब है कि आप एक से ज़्यादा भाषाओं की जानकारी रखने पर, एक उम्मीदवार के रूप में ज़्यादा नौकरियों के बारे में सोच सकते हैं. इसके अलावा, आपका प्रोफ़ाइल उन नियोक्ताओं के लिए आकर्षक बन जाता है, जो भाषा प्रशिक्षण के भाग के रूप में खर्च होने वाली लागत पर बचत करना चाहते हैं. इस तरह के फ़ायदे न केवल वैश्विक स्थानीयकरण इंडस्ट्री में, बल्कि कई दूसरे क्षेत्रों में भी लागू होते हैं।

उदाहरण 1

आतिथ्य / पर्यटन : इस इंडस्ट्री में उन ग्राहकों के साथ बातचीत करना शामिल है, जो या तो स्थानीय भाषा नहीं बोलते हैं या यहां तक ​​कि अगर वे ऐसा करते हैं, तो वे स्थानीय भाषा को भी अपनी भाषा के लहज़े में बोलना पसंद करते हैं. ऐसे मामलों में, स्थानीय भाषा के साथ-साथ कस्टमर की मूल भाषा बोलने में सक्षम होने के कारण कस्टमर के साथ बातचीत में सुधार होता है, आपसी विश्वास बढ़ता है और इससे लाभ में भी वृद्धि होती है.

उदाहरण 2

पत्रकारिता: यदि आप किसी अन्य देश में एक विदेशी संवाददाता हैं या भारत जैसे बहुभाषी देश में किसी अन्य राज्य में तैनात हैं, तो आप जिस भाषा में समाचारों की रिपोर्टिंग करते हैं, वह भाषा सीखना आपके लिए बहुत फ़ायदेमंद होगा. पत्रकारिता समुदाय में यह बात प्रचलित है कि अगर आप लोगों से उनकी स्थानीय भाषा में बातचीत करते हैं, तो वे खुलकर आपसे बात कर पाते हैं, उनसे आपको ज़्यादा जानकारी मिल सकती है और उनकी सोच को आप बेहतर ढंग से समझ सकते हैं, पर गैर-स्थानीय भाषा का इस्तेमाल करके ऐसा नहीं किया जा सकता.

क्या आप नई भाषा सीखने के हमारे कारणों से सहमत हैं? क्या आप इसके बारे में कुछ और कहना चाहते हैं? हमें अपने सुझाव, जानकारी वगैरह नीचे टिप्पणियों में बताएं. हम आपके विचार जान्ने के लिए उत्सुक हैं.

References :

[1] Marian, V., & Shook, A. (2012). The cognitive benefits of being bilingual. Cerebrum : the Dana forum on brain science, 2012, 13.

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